अध्याय:3 गरीबी (Class-9,Economics)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न सही उत्तर का संकेताक्षर (क, ख, ग, घ) लिखें।

1.विहार में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करनेवाली ग्रामीण जनसंख्या को प्रतिशत राष्ट्रीय औसत

(क) कम है (ख)बराबर है (ग) अधिक है (घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर-(ग)

2.बिहार में 1999-2000 में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत था

(क)42.6 (ख) 44.3 (ग) 54.3 (घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर-(क)

3.भारत की प्रमुख आर्थिक समस्या नहीं है

(क) आर्थिक विषमता (ख) औद्योगिक विकास (ग) गरीबी (घ) औद्योगिक पिछड़ापन

उत्तर-(ख)

4.गरीबी में बिहार राज्य भारत के राज्यों में कौन-सा स्थान है?

 (क) पहला (ख) दूसरा (ग) तीसरा (घ) चौथा

उत्तर-(ख)

5.2001 की जनगणना के अनुसार भारत के इन राज्यों में सबसे अधिक गरीवी कहाँ

(क) उड़ीसा (ख) झारखंड (ग) प० बंगाल (घ) उत्तरप्रदेश

 उत्तर-(क)

6.गरीबी रेखा के नीचे रहना

(क) अमीरी का द्योतक है (ख) गरीबी का सूचक है (ग) खुशहाली का सूचक है (घ) इनमें से किसी का भी सूचक नहीं है

उत्तर-(ख)

7.शहरी क्षेत्र के व्यक्तियों को प्रतिदिन कितना कैलोरी भोजन की आवश्यकता है?

(क) 2400 कैलोरी (ख) 2100 कैलोरी (ग) 2300 कैलोरी (घ) 2200 कैलोरी

उत्तर-(ख)

8.निम्न में से कौन प्राकृति आपदा के अंतर्गत आते हैं?

(क) कृषि (ख) उद्योग (ग) बाढ़ (घ) इनमें से कोई नहीं

 उत्तर-(ग)

9.MPCE के द्वारा गरीबी रेखा का निर्धारण ग्रामीण क्षेत्रों में कितना रु. प्रतिमाह किया गया?

(क) 328 रु. (ख) 524 रु. (ग) 454 रु. (घ) 354 रु.

उत्तर-(क)

10.SGSY योजना की शुरुआत कब की गयी?

(क) 2000 ई. (ख) 1999 ई० (ग) 2001 ई. (घ) 1998 ई.

उत्तर-(ख)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

(i).बिहार आर्थिक दृष्टि से एक…… राज्य है।

(ii).योजना काल में गरीबी की रेखा के नीचे आनेवाले लोगों की प्रतिशत में…….हई है।

(iii).भारत में शहरी गरीबों की तुलना में ग्रामीण गरीबों की संख्या ……..है।

(iv).जो लोग गरीबी रेखा के ऊपर रहते हैं उन्हें……… कहा जाता है।

(v).जब निम्नतम जीवन यापन प्राप्त करने की असमर्थता हो तो उसे………..कहते हैं।

(vi) MPCE के द्वारा गरीबी रेखा का निर्धारण शहरी क्षेत्रों में…..है।

(vii) 2007 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के ग्रामीण क्षेत्र में …….करोड़ जनसंख्या गरीब है।

उत्तर-(i) पिछड़ा. (ii) कमी, (iii) अधिक, (iv) अमीर. (v) गरीब, (vi) 454 रु०,(vii) 17 करोड़।

सही कथन में टिक(√) तथा गलत कथन में क्रॉस (x) करें

(i)राज्य में आधारभूत संरचना की कमी गरीबी का एक प्रमुख कारण है।√)

(ii) ग्रामीण गरीबी निवारण के लिए कृषि आधारित उद्योगों के विकास की आवश्यकता है।(√),

(iii) जनसंख्या में वृद्धि देश की एक प्रमुख आर्थिक समस्या नहीं है। (x)

(iv)केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन के द्वारा गरीबी रेखा की परिभाषा दी गयी है। (√)

(v) शहरी क्षेत्र के व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र के व्यक्तियों की अपेक्षा कम काम करते हैं।(x)

(vi) ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए प्रतिदिन 2400 कैलोरी भोजन की आवश्यकता है। (√)

 निम्न संक्षिप्त शब्दों को पूर्ण रूपेण लिखें:

(क)Nsso

उत्तर-National Sample Survey organisation (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन)

(ख) MPCE

उत्तर-Monthly per capita Consumption (मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय)

(ग) SHG

 उत्तर-Self Help Group (स्वयं सहायता समूह)

(घ) SGSY

उत्तर-Swam Jayanti Gram Rozgar Yojana (स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना)

(ङ) JRY

उत्तर-Jawahar Rozgar Yojana (जवाहर रोजगार योजना)

(च) IRDP

 उत्तर-Integrated Rural Development Programme (समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम)

(छ) MDMS

 उत्तर-Mid Day Meal Scheme (मध्याह्न भोजन योजना)

(ज) NREP

उत्तर-National Rural Employment Programme (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम)

(झ) PMRY

उत्तर-Prime Minister’s Rozgar Yojana (प्रधानमंत्री रोजगार योजना)

(य).PMGY

उत्तर-Prime Minister’s Gramodhya Yojana (प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना)

लघु उत्तरीय प्रश्न (उत्तर 20 शब्दों में दें)

प्रश्न 1. योजना आयोग ने किस आधार पर गरीबी की परिभाषा दी है?

उत्तर-योजना आयोग ने कैलोरी के आधार पर गरीबी की परिभाषा दी है।

प्रश्न 2. गरीत के दो विशिष्ट पहलुओं की विवेचना करें।

उत्तर-गरीबी के दो विशिष्ट पहलू शहरी गरीबी में रामपुकार का है तथा ग्रामीण गरीबी में राजेन्द्र सिंह की है जो अपना जीवन जी तो लेते हैं पर किसी सुख-सुविधा से वंचित रहते हैं और अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाते हैं।

 प्रश्न 3. गरीबी रेखा से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-योजना आयोग के द्वारा गरीबी रेखा को कैलोरी मापदंड पर आधारित माना गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तथा शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन निर्धारित किया गया है। इससे कम कैलोरी प्रतिदिन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को गरीबी रेखा के नीचे तथा इससे अधिक कैलोरी प्राप्त करने वाले व्यक्ति को इससे ऊपर रखा गया है।

प्रश्न 4. क्या आप समझते हैं कि गरीवी आकलन का वर्तमान तरीका सही है?

उत्तर-हाँ, हम समझते हैं कि गरीबी आकलन का वर्तमान तरीका सही है क्योंकि इसमें व्यक्ति के उपभोग स्तर को आधार बनाया गया है।

प्रश्न 5. किन-किन बातों से सिद्ध होता है कि भारतीय गरीब हैं?

उत्तर-स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, रोजगार के अवसरों की कमी, सुरक्षित पेयजल एवं स्वच्छता तक पहुँच की कमी आदि से सिद्ध होता है कि भारतीय गरीब हैं।

प्रश्न 6. गरीबी के कारणों में जनसंख्या वृद्धि की क्या भूमिका है?

उत्तर-भारत की गरीबी का मुख्य कारण देश की तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या है। इसके कारण लोगों का जीवन-स्तर गिर रहा है तथा देश की गरीबी बढ़ रही है।

प्रश्न 7. भारत में गरीबी के किन्हीं चार प्रमुख कारण बताएँ।

उत्तर-भारत में गरीबी के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

(i) जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि का होना।

(ii) कृषि का पिछड़ापन होना।

(iii) पूँजी का अभाव होना।

(iv) प्राकृतिक साधनों के समुचित उपयोग का अभाव होना है।

प्रश्न 8. गरीवी निवारण के लिए किए गए सरकारी प्रयासों की संक्षिप्त चर्चा करें।

उत्तर-गरीबी निवारण के लिए किए गए सरकारी प्रयासों में राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम तथा न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना आदि प्रमुख रूप से कार्य कर रहे हैं जिससे गरीबी में कमी दिखाई दे रही है।

प्रश्न 9. भारत में गरीबी निदान के लिए किए गए गैर-सरकारी प्रयासों को बताएँ।

उत्तर-भारत में गरीबी निदान के लिए किए गए गैर सरकारी प्रयासों में स्वरोजगार सामूहिक खेती, सामुदायिक विकास कार्यक्रम एवं स्वयं सहायता समूह प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

प्रश्न 10. बिहार में ग्रामीण गरीबी की क्या स्थिति

उत्तर-बिहार में ग्रामीण गरीबी की स्थिति बहुत खराब है। इसमें अशिक्षा, कपोषण तथा नियमित रोजगार की कमी स्वच्छ जल तथा सफाई सुविधाओं का भी अभाव है।

प्रश्न 11. बिहार में ग्रामीण गरीबी के चार प्रमुख कारणों को बताएँ।

उत्तर-बिहार में ग्रामीण गरीबी के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

(i) ग्रामीण निरक्षरता, (ii) रोजगार की कमी, (ii) पूँजी का अभाव. (iv) प्रतिकूल सामाजिक वातावरण।

प्रश्न 12. बिहार में ग्रामीण गरीबी निदान के लिए किन्हीं पाँच उपायों को बताएँ।

उत्तर-बिहार में ग्रामीण गरीबी निदान के लिए पाँच उपाय निम्नलिखित हैं

(i) कृषि उत्पादन में वृद्धि.

(ii) कृषि का औद्योगिकीकरण.

(iii) यातायात के साधनों का विकास,

 (iv) लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास,

 (v) ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश में वृद्धि।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (उत्तर 100 शब्दों में दें)

प्रश्न 1. भारत में गरीबी रेखा को किस प्रकार पारिभाषित किया गया है? इस परिभाषा के आधार पर भारत में गरीबी के विस्तार का क्या अनुमान लगाया जाता है?

उत्तर-गरीबी रेखा-योजना आयोग ने न्यूनतम कैलोरी उपभांग को ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिदिन 2400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी निर्धारित किया है तथा मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय के आधार पर गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्रों में 328 रु० प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और शहरीक्षेत्र में 454 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह निर्धारित किया है। इस सीमा को प्राप्त नहीं करने वाले व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे कहे जाते हैं। इस प्रकार गरीबी रेखा का आकलन की एक सर्वमान्य विधि आय तथा उपभोग स्तरों पर आधारित है। काल तथा स्थान के अनुसार गरीबी रेखा भिन्न हो सकती है। इसलिए प्रत्येक देश एक काल्पनिक रेखा का प्रयोग करता है जिसे विकास एवं उसके स्वीकृत न्यूनतम सामाजिक मानदंडों के वर्तमान स्तर के अनुरूप माना जाता है। भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों की संख्या हाल के वर्षों में कुछ कम हई हैं। क्योंकि भारत में गरीबी अनुपात वर्ष 1973 में लगभग 55 प्रतिशत थी जो वर्ष 1993 में घटकर 36 प्रतिशत हो गयी। वर्ष 2000 में गरीबी रेखा के नीचे गरीबों का अनुपात 26 प्रतिशत हो गया है। यद्यपि गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की संख्या 20 प्रतिशत पूर्व के दो दशकों में गिरा है, गरीब लोगों की संख्या 22 करोड़ के लगभग काफी समय तक स्थिर रही। नवीनतम अनुमान में भारत में गरीबों की संख्या लगभग 20 करोड़ मानी जाती है।

प्रश्न 2.भारत में गरीबी के कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-भारत में गरीबी के बहुत से कारण हैं जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं

(i)जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि-भारत की गरीबी का मुख्य कारण देश की तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या है जिसके कारण लोगों का जीवन स्तर गिर रहा है तथा देश में गरीबी बढ़ रही है।

(ii)कृषि का पिछड़ापन-भारत की अधिकांश यानि 64% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है लेकिन उत्तम खाद, बेहतर किस्म के बीज तथा सिंचाई की सुविधा के अभाव में यह पिछडी हई अवस्था में है।

(III) पूँजी का अभाव-गरीबी के कारण लोगों में बचत की क्षमता कम होती है जिसके कारण आर्थिक क्रियाओं का विकास तथा विस्तार नहीं होता है।

(iv) प्राकृतिक साधनों के समुचित, उपयोग का अभाव-भारत में प्राकृतिक साधनों एवं मानवीय साधनों की प्रचुरता है पर इनके समुचित उपयोग नहीं होने से लोगों का गरीब होना स्वाभाविक है।

(v) औद्योगिकीकरण का अभाव-हमारे देश में उद्योगों का विकास एवं विस्तार तेजी से नहीं हुआ है जिसके कारण कृषि क्षेत्र से जनसंख्या का हस्तांतरण उद्योगों में नहीं हुआ है जिससे बेकारों की संख्या बढ़ने से गरीबी वर्तमान है।

(vi) आय तथा धन की विषमता-देश की आय एवं संपत्ति का अधिकांश भाग कुछ सीमित व्यक्तियों के हाथों में केंद्रित है। इसके कारण धनी और धनी तथा गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। इसलिए जनसंख्या का एक बड़ा भाग गरीबी में अपना जीवन-यापन कर रहा है।

(vii) बेरोजगारी एवं अदृश्य बेरोजगारी-उद्योग धंधों के अविकसित होने से यहाँ व्यापक रूप में बेरोजगारी पायी जाती है जिससे इच्छुक व्यक्ति को भी रोजगार नहीं मिल पाता है। पर ग्रामीण क्षेत्र में अदृश्य बेरोजगार की समस्या व्याप्त है।

(viii) विदेशी शासन-हमारे देश पर ब्रिटिश शासकों ने लंबे समय तक जो शासन कियाउसमें भारत के विकसित कुटीर उद्योगों का पतन हुआ और लाखों लोग गरीबी के शिकार हो गए।

(ix) प्रतिकूल सामाजिक वातावरण-अधिकांश भारतीय अशिक्षित एवं रूढिवादी होते हैं जिसके कारण वे अपने

आर्थिक और सामाजिक जीवन में किसी प्रकार का परिवर्तन पाना नहीं चाहते। इसके कारण भी देश में गरीबी विद्यमान है।

(x) यातायात के साधनों की कमी-भारत में यातायात के साधनों की कमी के कारण आर्थिक विकास की गति मंद है जिससे गरीबी विद्यमान है। इस प्रकार अशिक्षा, जनसंख्या इत्यादि गरीबी के कारण हैं।

प्रश्न 3. भारत में अपनाए गए गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की व्याख्या कीजिए।

 उत्तर-भारत में अपनाए गए गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम निम्नलिखित हैं

(i)राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम-यह 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू किया गया। यह कार्यक्रम उन ग्रामीण गरीबों के लिए हे. जो मजदूरी पर रोजगार करने के इच्छुक हैं। इनका कार्यान्वयन शत-प्रतिशत केन्द्रीय वित्तपोषित कार्यक्रम के रूप में किया गया है जिसमें निःशुल्क खाद्यान्न केन्द्रीय सरकार उपलब्ध कराती है।

(ii)राज्य रोजगार गारंटी कोष-इस कार्यक्रम के अंतर्गत अगर आवेदक को 15 दिनों के अंदर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह बेरोजगार भत्ते का हकदार होगा।

(iii)मध्याह्न भोजन योजना-इस योजना में स्कूली बच्चों को मुफ्त दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसमें केवल प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को ही सम्मिलित किया जाता है।

(iv) न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम-यह 1978-1979 में शुरू किया गया जिसका उद्देश्य देश की गरीब जनता को कम से कम न्यूनतम जरूरतों की पूर्ति करना है।

(v)समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम-यह 1980 से देश के सभी प्रखंडों में लागू किया गया। यह एक स्वरोजगार कार्यक्रम है जिसमें गाँवों के गरीबों को उत्पादक परिसंपत्ति देकर उनको आय में वृद्धि करने की कोशिश की जाती है ताकि वे आय अर्जित करके गरीबी रेखा के ऊपर जा सकें।

(vi)स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना-अप्रैल, 1989 में इसका नाम बदलकर स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना कर दिया गया। यह एक केन्द्र प्रायोजित कार्यक्रम है।

(vii)जवाहर रोजगार योजना-यह एक मजदूर आधारित रोजगार कार्यक्रम है। इसे कार्यक्रम को अप्रैल, 1989 में प्रारंभ किया गया।

(viii)प्रधानमंत्री रोजगार योजना-यह 1993-94 में शहरी क्षेत्र में बेकार शिक्षित युवकों को स्वरोजगार मुहैया कराने के लिए प्रारंभ की गई थी जिसे 1994-95 में ग्रामीण क्षेत्रों में भी विस्तारित किया गया।

(ix) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना-इस योजना को 2000-01 में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में गुणवत्ता के सुधार के लिए, जैसे-स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, पेयजल, आवास तथा ग्रामीण सड़कों में सुधार के उद्देश्य से रखा गया है।

(x) स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना-इस कार्यक्रम को दिसम्बर, 1997 में प्रारंभ किया गया। यह योजना शहरी क्षेत्र में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले शिक्षित बेरोजगार तथा कम रोजगाररत लोगों को रोजगार प्रदान करने के लिए प्रारंभ की गई। इस प्रकार इन कार्यक्रमों के माध्यमों से गरीबी के प्रतिशत में गिरावट आई है।

प्रश्न 4. भारत में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की कमियाँ वताएँ।

उत्तर-भारत में गरीबी आजादी के छः दशकों के बीत जाने के बावजूद एक गंभीर समस्या बनी हई है जिसे सरकार अपनी पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यमों से विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को संचालित करती है। पर परिणाम अपेक्षित नहीं आ रहे हैं। इसलिए इन कार्यक्रमों में कुछ कमियाँ हैं जो निम्न हैं

(I)सतही अवलोकन-इन कार्यक्रमों के द्वारा जो अवलोकन किए जाते हैं वे बिल्कुल सतही होते हैं जिसके कारण कार्यक्रम की पूरी सफलता संदिग्ध हो जाती है।

(II) जनता की भगीदारी न्यून-इन कार्यक्रमों के निर्माण में जनता की भागीदारी न्यून होती है जिससे कार्यक्रम में पर्याप्त कमियाँ रह ही जाती हैं।

(III) धन की कमी-इन कार्यक्रमों में धन का प्रायः अभाव दिखायी देता है जिसके कारण कार्यक्रम कभी समय पर पूरा नहीं हो पाता है। फलतः कार्यक्रम अधूरा ही रह जाता है।

(iv) पर्याप्त संसाधनों का अभाव-कोई भी कार्यक्रम को संचालित करने के लिए संसाधनों का होना बहुत जरूरी होता है पर भारत में इसका अभाव पाया जाता है जिससे कार्यक्रमों में कमियाँ रह जाती हैं।

(v) कार्यक्रमों का पारदर्शी न होना-इस प्रकार के कार्यक्रम काफी जटिल होते हैं जिससे लोग इसमें रुचि नहीं लेते हैं। फलत: इनमें कमी प्रकट हो जाती है और परिणाम नहीं मिल पाता है। इस प्रकार, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में पर्याप्त कमियाँ हैं।

प्रश्न 5. बिहार में ग्रामीण गरीबी के मुख्य कारण कौन से हैं? इस समस्या के समाधान के लिए उपाय वताएँ।

 उत्तर-बिहार में ग्रामीण गरीबी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

(i) जनसंख्या का तेजी से वृद्धि-बिहार में ग्रामीण जनसंख्या का तीव्र गति से वृद्धि हुई है पर संसाधन के अभाव के कारण उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाने से गरीबी बढ़ी है।

(ii) कृषि का पिछड़ापन-यहाँ पर कृषि का पिछड़ापन भी व्याप्त, है जैसे-उत्तम खाद, बेहतर बीज तथा सिंचाई सुविधाओं का अभाव होने से यह पिछड़ी हुई अवस्था में है।

(iii)लघु एवं कुटीर उद्योग का अभाव-बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में लघु एवं कुटीर उद्योग का अभाव है जिससे गरीबी यहाँ पर विद्यमान है।

(iv) अदृश्य बेरोजगारी का होना-बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कुछ दिनों तक ही रोजगार कृषि में मिल पाता है जिससे उन्हें गरीबी की स्थिति को स्वीकार करना पड़ता है।

(v) यातायात के साधनों की कमी-बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात के साधनों की स्थिति खराब है जिससे संसाधनों तक लोगों की पहुँच असंभव है। इस प्रकार जनसंख्या का तेजी से वृद्धि, कृषि का पिछड़ापन आदि बिहार के ग्रामीण गरीबी के मुख्य कारण हैं।

 बिहार में ग्रामीण गरीबी की समस्या के समाधान के निम्नलिखित उपाय हैं

(i)ग्रामीण प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग-ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करके गरीबी को समाप्त किया जा सकता है।

(II) लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा-ग्रामीण क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण गरीबी को दूर किया जा सकता है।

(iii) यातायात के साधनों का विकास-ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात के साधनों का विकास कर संसाधनों का विकास किया जा सकता है जिससे गरीबी को उन्मूलित किया जा सकता है।

(iv) कृषि उत्पादन में वृद्धि-ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में वृद्धि करके ग्रामीण गरीबी की समस्या का समाधान किया जा सकता है।

(v) पूँजी की व्यवस्था-पूँजी की व्यवस्था करके ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। इससे ग्रामीण गरीबी का भी निदान संभव है। इस प्रकार, बिहार में ग्रामीण गरीबी की समस्या का समाधान किया जा सकता है।

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